खुदा छूटा !

आप कहते हो कि जहाँ छूटा,
हमको तो जिस्मका पता छूटा !

अब हमें ये भी ना रहा मालूम,
राहमें कौन फिर कहाँ छूटा ?

अब उसे कैसे, कौन समजाये ?
बूत पकड़ा तो फिर खुदा छूटा !

काम होता है उनकी मर्जीसे,
चाह छूटी, भला-बुरा छूटा !

जो भी आए जी में कहो ”सुधीर”,
मुद्दतोंसे कहा-सूना छूटा !
                        —सुधीर पटेल

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8 Comments »

  1. બહોત અચ્છે…

    સુંદર હિન્દી ગઝલ…

  2. Rakesh Thakkar, વાપી said

    Bahut achhi Gazal.
    अब उसे कैसे, कौन समजाये ?
    बूत पकड़ा तो फिर खुदा छूटा !

  3. Pinki said

    Bahut khub …… !!

    masha allallah kaun manega gujju poet hai

  4. pragnaju said

    काबिले दाद मत्ला व सेर
    मगर हमें लगता है—-
    दर्द मिलेंगा हर दिल में तुमको
    काव्यमय चित्र ना बनाया करो
    गर काव्य ही लिखना चाहो तो
    तुकतुकजी सा कुछ लिखा करो

    बहुत बहा चूके हो गम के आंसू
    अब लेखनी में ऐसी जान भरो
    बरसो से भूला जो हँसना-हँसाना
    चहरे पर उसके मुस्कान धरो

    भले रच दो महाकाव्य गम में
    दर्द दिलों का न इससे मिटेगा
    क्या बसेगा गम वहाँ तुम्ही बताओ?
    जब कहीं हँसी का गुब्बार फटेगा

  5. mrunalini said

    अब उसे कैसे, कौन समजाये ?
    बूत पकड़ा तो फिर खुदा छूटा !
    काबिले दाद
    बूत हम को कहे काफ़िर, अल्लाह की मरज़ी है
    ना-तजूरबाकारी से, वाइज़ की ये बातें हैं …..
    और यह भी कहा करते थे कि तुम खुदा से दुआ
    मांगो कि मेरी उम्र लम्बी हो,
    क्योंकि मेरी जिंदगी से ही तेरी ….
    अब ना माँगेंगे ज़िन्दगी या रब
    ये गुनाह हम ने एक बार किया ………………..

  6. kishoremodi said

    સરસ હિંદી ગઝલ અભિનન્દન

  7. nice one….!

  8. अब उसे कैसे, कौन समजाये ?
    बूत पकड़ा तो फिर खुदा छूटा !

    काम होता है उनकी मर्जीसे,
    चाह छूटी, भला-बुरा छूटा !

    Wah, Sudhirbhai, your grip on Gazals of Gujarati and Hindi both are excellent.
    Enjoyed verymuch.

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