हो जाते हैं

एक आँगन में दो आँगन हो जाते हैं !
मत पूछा कर किस कारन हो जाते हैं !!

हुस्न की दौलत मत बाँटा कर लोगों में !
ऐसे वैसे लोग महाजन हो जाते हैं !!

ख़ुशहाली में सब होते हैं ऊँची ज़ात !
भूखे-नंगे लोग हरिजन हो जाते हैं !!

राम की बस्ती में जब दंगा होता है !
हिंदू- मुस्लिम सब रावन हो जाते हैं !!

– मुनव्वर राणा

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6 thoughts on “हो जाते हैं

  1. મુનવ્વર રાના મને ઉર્દૂ ગઝલમાં સૌથી ગમતા શાયર …..એમના મા ઉપરના શેર…એકે એક જબર જસ્ત છે
    ……राम की बस्ती में जब दंगा होता है !
    हिंदू- मुस्लिम सब रावन हो जाते हैं !!
    વાહ….વાહ…..

  2. વાહ….વાહ…..
    राम की बस्ती में जब दंगा होता है !
    हिंदू- मुस्लिम सब रावन हो जाते हैं !!

  3. वाह, मुनव्वर राणा जी का जवाब नहीं, हर एक शे’र अपने आपमें मुकम्मिल ..

    बढिया गज़ल… !!

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