हासिल कर

महेनत करने से ना डर, हाथ बढ़ा और हासिल कर,
तुझको भी फूटेंगे पर, हाथ बढ़ा और हासिल कर।

मरना सब को है एक दिन ये पक्का तो डरना क्या,
मरने से पहेले ना मर, हाथ बढ़ा और हासिल कर ।

एक बड़ा सा लक्ष्य नज़र के सामने रख, और आगे बढ़-
ख्वाब जरा आंखो में भर, हाथ बढ़ा और हासिल कर ।

चलने की शुरुआत करे तो रस्ता अपने आप मिले,
छोड़ अभी तू अगर मगर, हाथ बढ़ा और हासिल कर ।

ऐसा कर कि लोग यहाँ पर सालों तक बस याद करें,
छोड़ जा अपना कोई असर, हाथ बढ़ा और हासिल कर ।

– अशोक जानी ‘आनन्द’

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6 thoughts on “हासिल कर

  1. हाथ बढ़ा और हासिल कर । ….ક્યાં બાત હૈ, અશોકજી ….આપને તો મન હર લિયા…..

  2. प्रोत्साहित करनेवाली गझल।
    बहोत सुंदर, अंदरसे जगानेवाले
    शब्द प्रयोग, अभिनंदन अशोकभाइ।

  3. અશોકભાઈ કોઈકવાર હિન્દી પણ અજમાવો છો.. અભિનંદન.

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