क्या हो गया ?

परस्तिश में हमसे ये क्या हो गया ?
वो इंसा था कैसे खुदा हो गया !

थे मगरूर जिनकी वफ़ा पे कभी,
न जाने उन्ही से गिला हो गया ।

बहुत मिन्नतें की दुआ में मगर,
जो अपना था,हम से जुदा हो गया।

ये दिवार किसने बनायीं कहो ?
घरों के दरमियाँ किला हो गया।

घनी छॉंव है धुप में घर मेरा,
मेरी माँ ने माँगा अता हो गया।

– स्मिता शाह ‘मीरां’

4 thoughts on “क्या हो गया ?

  1. बहोत ही बढ़िया…. !!

    मत्लआ से मक्तआ तक सभी शे’र काबिल-ए-दाद

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