धुलने तो दो

थका कारवां पल गुजरने तो दो !
कड़ी धुप हैं शाम ढलने तो दो !

जमी आँख में गम की तन्हाईया,
ये लम्हों को अश्कोंसे धुलने तो दो !

ये चिलमन हटा दो कि बेताब हूँ,
निगाहें निगाहों से मिलने तो दो !

चलो तुम ज़रा और हम भी चलें,
दिलों की ये गिरहों को खुलने तो दो !

बहुत थक गया भागते भागते,
कहीं वक़्त को भी ठहरने तो दो !

– स्मिता शाह ‘मीरां’

10 thoughts on “धुलने तो दो

  1. बहुत थक गया भागते भागते,
    कहीं वक़्त को भी ठहरने तो दो ! Wah! nice gazal.

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