रास्ता मेरा

वकत अच्छा,गुज़र गया मेरा ;
कौन चाहेगा अब भला मेरा ।

देखिये युं तो मैं कहीं भी नहीं;
फिरभी चर्चा है हर जग्हा मेरा।

कामयाबीका दबदबा जो नहीं;
कैसे माने कोई कहा मेरा ।

मुझको अहेसास हो रहा जैसे;
रुठा रुठा सा है खुदा मेरा।

मैने सोचा न खुदगर्ज़ीसे कभी;
हैं कहाँ , कितना फायदा मेरा।

तेरा ईन्साफ सोचता हूँ तो;
तूट जाता है हौसला मेरा।

कोई उम्मीद अब कहाँ ‘नाशाद’;
सूना सूना जो रास्ता मेरा ।

– गुलाम अब्बास ‘नाशाद’

8 thoughts on “रास्ता मेरा

  1. देखिये युं तो मैं कहीं भी नहीं;
    फिरभी चर्चा है हर जग्हा मेरा।… बहोत ही बढ़िया !!

    उमदा ग़ज़ल !

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