चलो अब….

चलो अब आखिरी शम्मे बुझा दो ,
ये ख़ाली जाम , पैमाने हटा दो |

कभी होगी नहीं अबके सहर भी ,
सुनो ,अब चाँद तारों को सुला दो |

सुनेगा कौन गुज़री दास्ताँ अब ,
ज़माने से निशाँ अपने मिटा दो |

चलो माना नहीं हम भी पशेमाँ ,
मगर ये क्या की तुम हमको भुला दो !

न जाने बोझ सा ये दिल पे क्या हैं !
उतारो क़र्ज़ ये लम्हा बिता दो…

– स्मिता शाह ‘मीरा’

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10 thoughts on “चलो अब….

  1. ક્યા બાત હૈ!
    कभी होगी नहीं अबके सहर भी ,
    सुनो ,अब चाँद तारों को सुला दो |

  2. सुनेगा कौन गुज़री दास्ताँ अब ,
    ज़माने से निशाँ अपने मिटा दो |… वाह…!!

    हर एक अशआर तारिफ -ए-काबिल

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