भूल जायें

भूल जायें इस जहाँ को आज कुछ पल के लिए,
गुनगुनायें गीत, छोडे फिक्र हम कल के लिए,
दोस्तों का साथ है माहौल है मस्ती भरा,
और अब क्या चाहिये हमें दिल ये पागल के लिए..?…. भूल जायें

होठ पर ले कर तबस्सुम आओ तो अच्छा लगे,
एक मीठी याद देकर जाओ तो अच्छा लगे,
क्या करेंगे आप अपने पास रखकर के इसे..!
खुश हो कर तालियां बरसाओ तो अच्छा लगे.
कुछ सितारे ढूंढ लाया हूँ मैं आँचल के लिए ।…… भूल जायें

अलविदा कहेते हुए अच्छा नहीं लगता मगर,
आंखसे बहेते हुए अच्छा नहीं लगता मगर,
आज गर बिछडे हैं तो कल फिर युं मिलने के लिए,
यार बिन रहेते हुए अच्छा नहीं लगता मगर..!!
क्या करूँ मैं अब जतन इस दिल मेरे बोझल के लिए ।……भूल जायें

– अशोक जानी ‘आनंद’

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7 thoughts on “भूल जायें

  1. Kya baat hai! 👀
    अलविदा कहेते हुए अच्छा नहीं लगता मगर,
    आंखसे बहेते हुए अच्छा नहीं लगता मगर,
    आज गर बिछडे हैं तो कल फिर युं मिलने के लिए,
    यार बिन रहेते हुए अच्छा नहीं लगता मगर..!!
    क्या करूँ मैं अब जतन इस दिल मेरे बोझल के लिए ।……भूल जायें

  2. यार बिन रहेते हुए अच्छा नहीं लगता मगर… बहोत खूब… अशोकभाई…

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